Sandhi kise kahate hain: संधि की परिभाषा, संधि विच्छेद एवं इसके प्रकार उदाहरण सहित 2024-25

Sandhi

दो वर्णो (स्वर या व्यंजन) के मेल से होने वाले विकार को संधि (Sandhi) कहते हैं| इसमें दो अक्षर के मिलने से तीसरे शब्द की रचना होती हैं| जैसे- कान+कटा = कनकटा, यथा+उचित = यथोचित, हाथ+कड़ी = हथकड़ी इत्यादि|

Sandhi

संधि (Sandhi) किसे कहते हैं?

दो अक्षरों के आपस में मिलने से उनके रूप और उच्चारण में जो परिवर्तन होता हैं, उसे संधि (Sandhi) कहते हैं| दूसरे शब्दों में संधि की परिभाषा (sandhi ki paribhasha) का अर्थ हैं, जब दो शब्द मिलते हैं, तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि और दूसरे शब्द की पहली ध्वनि आपस में मिलकर जो परिवर्तन करता हैं, वह संधि कहलाता हैं| संधि दो शब्दों से मिलकर बना हैं- सम+धि, जिसका अर्थ ‘मिलना’ होता हैं| इसमें दो अक्षरों के मेल से तीसरे शब्द की रचना होती हैं|

संधि (Sandhi) कितने प्रकार के होते हैं?

संधि (Sandhi) के तीन भेद हैं-

  • स्वर संधि
  • व्यंजन संधि
  • विसर्ग संधि

स्वर संधि

दो स्वरों के आपस में मिलने से जो रूप परिवर्तन होता हैं, उसे स्वर संधि कहते हैं| अर्थात संधि दो स्वरों से उत्पन्न विकार या रूप परिवर्तन हैं| जैसे- भाव + अर्थ = भावार्थ|
ऊपर दिए गए शब्दों में ‘भाव’ शब्द का अंतिम स्वर ‘अ’ एवं ‘अर्थ’ शब्द का पहला स्वर ‘अ’ दोनों शब्दों के मिलने से ‘आ’ स्वर की उत्पत्ति हुई| जिससे “भावार्थ” शब्द का निर्माण हुआ| इसके अन्य उदाहरण निचे दिए गए हैं-

  • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
  • महा + ईश = महेश
  • मुनि + इंद्र = मुनीन्द्र
  • सूर्य + उदय = सूर्योदय
  • कवि + ईश्वर = कवीश्वर

स्वर संधि के प्रकार

स्वर संधि पांच प्रकार के होते हैं-

  1. दीर्घ स्वर संधि
  2. गुण स्वर संधि
  3. वृद्धि स्वर संधि
  4. यण स्वर संधि
  5. अयादि स्वर संधि
दीर्घ स्वर संधि

दो सुजातीय स्वर के आस – पास आने से जो स्वर बनता हैं, उसे दीर्घ स्वर संधि कहते हैं| इसे हस्व संधि भी कहा जाता हैं| जैसे- अ/आ + अ/आ = आ, इ/ई + इ/ई = ई, उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ ऋ + ऋ = ऋ इत्यादि | उदाहरण-

  • गिरि + ईश = गिरीश
  • भानु + उदय = भानूदय
  • शिव + आलय = शिवालय
  • कोण + अर्क = कोणार्क
  • देव + असूर = देवासूर
  • गिरि + इन्द्र = गिरीन्द्र
  • पितृ + ऋण = पितृण
गुण स्वर संधि

जब अ, आ के साथ इ, ई हो तो ‘ए’ बनता हैं| जब अ, आ के साथ उ, ऊ हो तो ‘ओ’ बनता हैं| जब आ, आ के साथ ऋ हो तो ‘अर’ बनता हैं, उसे गुण संधि कहते हैं| जैसे- अ + इ = ए, अ + उ = ओ, आ + उ = ओ, अ + ई = ए इत्यादि| उदाहरण-

  • नर + इंद्र = नरेंद्र
  • भारत + इंदु = भारतेन्दु
  • देव + ऋषि = देवर्षि
  • सर्व + ईक्षण = सर्वेक्षण
वृद्धि स्वर संधि

जब अ, आ के साथ ए, ऐ हो तो, ‘ऐ’ बनता हैं| और जब अ, आ के साथ ओ, औ हो तो ‘औ’ बनता हैं| उसे वृद्धि स्वर संधि कहते हैं| जैसे- अ + ए = ऐ, आ + ए = ऐ, आ + औ = औ, आ + ओ = औ इत्यादि| उदाहरण-

  • मत + एकता = मतैकता
  • एक + एक = एकैक
  • सदा + एव = सदैव
  • महा + ओज = महौज
यण स्वर संधि

यदि इ, ई, उ, ऊ और ऋ के बाद कोई अलग स्वर आये, तो इ – ई का ‘यू’, उ – ऊ का ‘व्’ और ऋ का ‘र’ बनता हैं| जैसे- इ + अ = य, इ + ऊ = यू , उ + आ = वा, उ + औ = वौ इत्यादि|

  • परी + आवरण = पर्यावरण
  • अनु + अय = अन्वय
  • सु + आगत = स्वागत
  • अभि + आगत = अभ्यागत
अयादि स्वर संधि

यदि ए, ऐ, ओ, और औ के बाद कोई भिन्न स्वर आए, तो ए को ‘अय’, ऐ को ‘अय’, ओ को ‘अव’ और औ का ‘आव’ हो जाता हैं| जैसे- ए + अ = अय, ऐ + अ = आयओं इत्यादि| उदाहरण-

  • ने + अन = नयन
  • गै + अक = गायक
  • शे + अन = शयन
  • पौ + अन = पावन

व्यंजन संधि

यदि व्यंजन वर्ण के साथ व्यंजन वर्ण या स्वर वर्ण की संधि से व्यंजन में कोई विकार उत्पन्न हो, तो उसे व्यंजन संधि कहते हैं| अर्थात दूसरे शब्दों में व्यंजन से स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उत्पन्न विकार को व्यंजन संधि कहते हैं| जैसे- सत् + गति = सदगति, वाक् +ईश = वागीश इत्यादि|

व्यंजन संधि के कुछ नियम होते हैं-

  • यदि ‘म्’ के बाद कोई व्यंजन वर्ण आये तो ‘म्’ का अनुस्वार हो जाता है| या वह बादवाले वर्ग के पंचम वर्ण में भी बदल सकता है। जैसे-
    • अहम् + कार = अहंकार
    • सम् + गम = संगम
  • यदि ‘त्-द्’ के बाद ‘ल’ रहे तो ‘त्-द्’ ‘लू’ में बदल जाते है और ‘न्’ के बाद ‘ल’ रहे तो ‘न्’ का अनुनासिक के बाद ‘लू’ हो जाता है। जैसे-
    • उत् + लास = उल्लास
  • यदि ‘क्’, ‘च्’, ‘ट्’, ‘त्’, ‘प’, के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आये, या, य, र, ल, व, या कोई स्वर आये, तो ‘क्’, ‘च्’, ‘ट्, ‘त्’, ‘प’, के स्थान में अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है। जैसे-
    • जगत् + आनन्द = जगदानन्द
    • दिक्+भ्रम = दिगभ्रम
    • तत् + रूप = तद्रूप
    • वाक् + जाल = वगजाल
    • अप् + इन्धन = अबिन्धन
    • षट + दर्शन = षड्दर्शन
    • सत्+वाणी = सदवाणी
    • अच+अन्त = अजन्त
  • यदि ‘क्’, ‘च्, ‘ट्, ‘त्’, ‘प’, के बाद ‘न’ या ‘म’ आये, तो क्, च्, ट्, त्, प, अपने वर्ग के पंचम वर्ण में बदल जाते हैं। जैसे-
    • अप् + मय = अम्मय
    • जगत् + नाथ = जगत्राथ
    • उत् + नति = उत्रति
    • षट् + मास = षण्मास
  • सकार और तवर्ग का शकार और चवर्ग के योग में शकार और चवर्ग तथा षकार और टवर्ग के योग में षकार और टवर्ग हो जाता है। जैसे-
    • रामस् + शेते = रामश्शेते
    • सत् + चित् = सच्चित्
    • महत् + छात्र = महच्छत्र
    • महत् + णकार = महण्णकार
    • बृहत् + टिट्टिभ = बृहटिट्टिभ
  • यदि वर्गों के अन्तिम वर्णों को छोड़ शेष वर्णों के बाद ‘ह’ आये, तो ‘ह’ पूर्ववर्ण के वर्ग का चतुर्थ वर्ण हो जाता है और ‘ह’ के पूर्ववाला वर्ण अपने वर्ग का तृतीय वर्ण। जैसे-
    • उत्+हत = उद्धत
    • उत्+हार = उद्धार
    • वाक् + हरि = वाग्घरि
  • हस्व स्वर के बाद ‘छ’ हो, तो ‘छ’ के पहले ‘च्’ जुड़ जाता है। दीर्घ स्वर के बाद ‘छ’ होने पर यह विकल्प से होता है। जैसे-
    • परि+छेद = परिच्छेद
    • शाला + छादन = शालाच्छादन

विसर्ग संधि

विसर्ग के साथ स्वर अथवा व्यंजन की संधि को विसर्ग संधि कहते हैं| जैसे- दुः + आत्मा = दुरात्मा, दुः + गंध = दुर्गन्ध| विसर्ग संधि के कुछ नियम होते हैं, जिसे निचे दिया गया हैं –

  • यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ आये और उसके बाद वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण आये या य, र, ल, व, ह रहे तो विसर्ग का ‘उ’ हो जाता है और यह ‘उ’ पूर्ववर्ती ‘अ’ से मिलकर गुणसन्धि द्वारा ‘ओ’ हो जाता है। जैसे-
    • यशः+ धरा = यशोधरा
    • पुरः+हित = पुरोहित
    • मनः+ योग = मनोयोग
    • सरः+वर = सरोवर
    • पयः + द = पयोद
    • मनः + विकार = मनोविकार
    • पयः+धर = पयोधर
    • मनः+हर = मनोहर
    • वयः+ वृद्ध = वयोवृद्ध
  • यदि विसर्ग के पहले इकार या उकार आये और विसर्ग के बाद का वर्ण क, ख, प, फ हो, तो विसर्ग का ष् हो जाता है। जैसे-
    • निः + पाप = निष्पाप
    • दुः + कर = दुष्कर
    • निः + फल = निष्फल
  • यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ हो और परे क, ख, प, फ मे से कोइ वर्ण हो, तो विसर्ग ज्यों-का-त्यों रहता है। जैसे-
    • पयः+पान = पयः पान
    • प्रातःकाल = प्रातः काल
  • यदि ‘इ’ – ‘उ’ के बाद विसर्ग हो और इसके बाद ‘र’ आये, तो ‘इ’ – ‘उ’ का ‘ई’ – ‘ऊ’ हो जाता है और विसर्ग लुप्त हो जाता है। जैसे-
    • निः + रोग = नीरोग
    • निः + रस = नीरस
  • यदि विसर्ग के पहले ‘अ’ और ‘आ’ को छोड़कर कोई दूसरा स्वर आये और विसर्ग के बाद कोई स्वर हो या किसी वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण हो या य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग के स्थान में ‘र्’ हो जाता है। जैसे-
    • निः + गुण = निर्गुण
    • निः+धन = निर्धन
    • दुः+नीति = दुर्नीति
    • निः+झर = निर्झर
    • दुः+गन्ध = दुर्गन्ध
  • यदि विसर्ग के बाद ‘च-छ-श’ हो तो विसर्ग का ‘श्’, ‘ट-ठ-ष’ हो तो ‘ष्’ और ‘त-थ-स’ हो तो ‘स्’ हो जाता है। जैसे-
    • निः+चय = निश्रय
    • निः+शेष = निश्शेष
    • निः+तार = निस्तार
    • निः+सार = निस्सार
  • यदि विसर्ग के आगे-पीछे ‘अ’ हो तो पहला ‘अ’ और विसर्ग मिलकर ‘ओ’ हो जाता है और विसर्ग के बादवाले ‘अ’ का लोप होता है तथा उसके स्थान पर लुप्ताकार का चिह्न (S) लगा दिया जाता है। जैसे-
    • प्रथमः + अध्याय = प्रथमोऽध्याय
    • यशः+अभिलाषी = यशोऽभिलाषी

संधि विच्छेद (Sandhi vichchhed) किसे कहते हैं?

संधि किये गए शब्दों को अलग – अलग करके पहले की तरह करना संधि विच्छेद (sandhi vichchhed) कहा जाता हैं| संधि दो शब्दों को मिलती हैं, लेकिन संधि विच्छेद दोनों शब्दों को उसके पहले स्वरुप में बदल देता हैं| निचे इसका उदाहरण दिया गया हैं-

शब्दसंधि
यथा + उचितयथोचित
महा + ऋषिमहर्षि
संधिसंधि विच्छेद
यथोचितयथा + उचित
महर्षिमहा + ऋषि
संधि विच्छेद

ऊपर दिए गए उदाहरण में यथा + उचित और महा + ऋषि को मिलाकर यथोचित और महर्षि शब्द बना हैं, जो कि संधि (Sandhi) को दर्शाता हैं| तथा इन दोनों संधि को अलग अलग कर दिया जाये तो वह संधि विच्छेद (Sandhi vichchhed) को दर्शाता हैं|

संधि (sandhi) के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न जो ज्यादातर एग्जाम में पूछे जाते हैं

निचे संधि (sandhi) का चार्ट दिया गया हैं, जिसमे शब्दों का संधि विच्छेद (sandhi viched) और उस संधि का नाम भी लिखा गया हैं-

संधिसंधि विच्छेदसंधि का नाम
अत्यधिक अति + अधिकस्वर संधि
विचारोत्तेजकविचार + उत्तेजकस्वर संधि
दिवसावसानदिवस + अवसान स्वर संधि
रक्ताभरक्त + आभ स्वर संधि
नीरसनिः + रसविसर्ग संधि
अनादि अन + आदि स्वर संधि
मनोहर मनः + हरविसर्ग संधि
महोदधिमहा + उदधि स्वर संधि
अनाथालयअनाथ + आलयस्वर संधि
छन्दावर्तनछन्द + आवर्तनस्वर संधि
अंतर्भूतअन्तः + भूतस्वर संधि
संवेदनात्मक संवेदन + आत्मकस्वर संधि
परमावश्यकपरम + आवश्यकस्वर संधि
इच्छानुसारइच्छा + अनुसारस्वर संधि
राजेन्द्रराजा + इन्द्रस्वर संधि
नीलोत्पलनील + उत्पलस्वर संधि
अधिकांशअधिक + अंश स्वर संधि
हिमाच्छादितहिम + आच्छादित व्यंजन संधि
देशोद्धारदेश + उद्धारस्वर संधि
तिमिरांचलतिमिर + अंचल स्वर संधि
तरंगाघाततरंग + आघात स्वर संधि
अनागतअन + आगतस्वर संधि
अतिश्योक्ति अतिश्य + उक्तिस्वर संधि
महाशयमहान + आशयस्वर संधि
हिमालयहिम + आलयस्वर संधि
कुटोल्लासकुट + उल्लासस्वर संधि
सज्जनसत् + जनव्यंजन संधि
दक्षिणेश्वर दक्षिण + ईश्वरस्वर संधि
यद्यपियदि + अपिस्वर संधि
स्वागतसु + आगतस्वर संधि
संधि विच्छेद और संधि का नाम

FAQs

संधि (Sandhi) के कितने भेद हैं?

संधि के तीन भेद हैं-
स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि|

क्या संधि और संधि विच्छेद में अंतर हैं?

संधि और संधि विच्छेद में एक मूल अंतर यह हैं, कि संधि दो शब्दों को मिलती हैं, लेकिन संधि विच्छेद दोनों शब्दों को उसके पहले स्वरुप में बदल देता हैं| जैसे- महा + आत्मा = महात्मा|
इसमें महत्मा शब्द संधि हैं, क्युकि यह दो शब्दों को जोड़ रहा हैं| तथा महा + आत्मा यह दोनों शब्द संधि विच्छेद हैं, क्युकि यह दोनों शब्दों को अलग कर रहे हैं|

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Pratyay kise kahate hain: प्रत्यय क्या होता है? इसके प्रकार उदाहरण सहित एवं उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर

Pratyay

प्रत्यय (pratyay) उस शब्दांश को कहते हैं, जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर उस शब्द के भिन्न अर्थ को प्रकट करता हैं| प्रत्यय उपसर्गो की तरह अविकारी शब्दांश हैं, जो शब्दों के बाद जोड़े जाते हैं| जैसे- मनुष्य में ‘ता’ शब्द लगाने से ‘मनुष्यता’ शब्द बनता हैं|

Pratyay
Pratyay

प्रत्यय (Pratyay) किसे कहते हैं?

प्रत्यय (Pratyay) वह शब्दांश हैं, जो किसी धातु या अन्य शब्द के अंत में जुड़कर शब्द के अर्थ को बदल देता हैं या नया शब्द बनाता हैं| उदहारण

  • सुगंध + इक = सुगन्धित
  • लोहा + आर = लुहार
  • लड़ + आका = लड़ाका
  • पागल + पन = पागलपन
  • होन + हार = होनहार

ऊपर दिए गए उदाहरण से स्पष्ट हैं, कि ‘प्रत्यय’ (Pratyay) अन्य शब्दों में जुड़ते हैं और फिर नए नए शब्दों की रचना करते हैं| उपसर्ग और प्रत्यय में एक मैन अंतर हैं, कि उपसर्ग शब्द के शुरुआत में जुड़ते हैं, और प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ते हैं|

प्रत्यय (Pratyay) का अर्थ

प्रत्यय (Pratyay) दो शब्दों से मिलकर बनता हैं- प्रति + अय| प्रति का अर्थ ‘साथ में, पर बाद में’ और अय का अर्थ ‘चलने वाला’ होता हैं| जिन शब्दों का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता वे किसी शब्द के पीछे लगकर उसके अर्थ में बदलाव कर देते हैं| अर्थात प्रत्यय का अपना अर्थ नहीं होता हैं| प्रत्यय अविकारी शब्दांश होते हैं, जो शब्दों के बाद में जोड़े जाते हैं| कभी कभी प्रत्यय (Pratyay) लगाने से अर्थ में कोई बदलाव नहीं होता हैं|

प्रत्यय (Pratyay) कितने प्रकार के होते हैं?

क्रिया तथा दूसरे शब्दों से जुड़ने के आधार पर प्रत्यय (Pratyay) के दो प्रकार होते हैं| इन प्रत्यय से बने शब्द को ‘कृदंत’ एवं ‘तद्धितांत’ कहते हैं|
प्रत्यय के दो प्रकार होते हैं-

  • कृत्त प्रत्यय
  • तद्धित प्रत्यय

कृत्त प्रत्यय

क्रिया से जुड़नेवाले प्रत्यय को ‘कृत्त प्रत्यय’ कहते हैं, एवं इनसे बने शब्द को ‘कृदंत’ कहते हैं| ये प्रत्यय क्रिया को नया अर्थ देते हैं| कृत्त प्रत्यय के योग से संज्ञा और विशेषण शब्दों की रचना होती हैं| उदहारण-

  • चाट + नी = चटनी
  • लिख + अक = लेखक

कृत्त प्रत्यय के प्रकार

कृत्त प्रत्यय चार प्रकार के होते हैं-

कर्तृवाचक कृत्त प्रत्यय: जिस शब्द से किसी के कार्य को करने वाले का बोध हो, उसे कर्तृवाचक कृत्त प्रत्यय कहते हैं| उदहारण-

धातुप्रत्यय शब्दक्रिया का कर्ता
भूलअक्कड़भुलक्कड़जो भूलता हैं
उड़अंकूउड़ंकूजो उड़ता हैं
खेल आड़ीखेंलाड़ी जो खेलता हैं
लूटएरालुटेराजो लुटता हैं
कर्तृवाचक कृत्त प्रत्यय

कर्मवाचक कृत्त प्रत्यय: जिस शब्द से बनने वाले शब्दों से किसी कर्म का बोध हो, उसे कर्मवाचक कृत्त प्रत्यय कहते हैं|

धातुप्रत्ययशब्दक्रिया का कर्ता
सूँघनीसुँघनीजिसे सुँघा जाय
खेलऔनाखिलौना जिसे खेला जाय
समृअनीयस्मरणीयजिसे स्मरण किया जाय
कृत्वयकर्तव्य जिसे किया जाय
कर्मवाचक कृत्त प्रत्यय

करणवाचक कृत्त प्रत्यय: जिस प्रत्यय की वजह से बने शब्द से क्रिया के कारण का बोध होता हैं, उसे करणवाचक कृत्त प्रत्यय कहते हैं|

धातुप्रत्ययशब्दक्रिया का कर्म
झाड़झाडू जिससे झाड़ा जाय
कसऔटीकसौटी जिससे कसा जाय
रेत रेती जिससे रेता जाय
बेलबेलनजिससे बेला जाय
करणवाचक कृत्त प्रत्यय

भाववाचक कृत्त प्रत्यय: जिस प्रत्यय के जुड़ने से भाववाचक संज्ञाएँ का बोध हो, उसे भाववाचक कृत्त प्रत्यय कहते हैं|

धातुप्रत्ययशब्दक्रिया की प्रक्रिया/भाव
चढ़आईचढ़ाई चढ़ने की क्रिया/भाव
पूज आपापुजापापूजने की क्रिया /भाव
हँसहँसीहँसने की क्रिया/भाव
चिल्लआहटचिल्लाहटचिल्लाने की क्रिया/भाव
भाववाचक कृत्त प्रत्यय

तद्धित प्रत्यय

धातुओं को छोड़कर अन्य दूसरे शब्दों में जुड़नेवाले प्रत्ययों को तद्धित प्रत्यय कहते हैं, एवं इनसे बने शब्द को तद्धितांत कहते हैं| कृत प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय में मूल अंतर यह हैं, कि कृत प्रत्यय सिर्फ धातुओं में लगते हैं और तद्धित प्रत्यय धातुओं को छोड़कर संज्ञा, विशेषण आदि शब्दों में लगते हैं| उदहारण-

  • राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय
  • पीछे + ला = पिछला

तद्धित प्रत्यय के प्रकार

तद्धित प्रत्यय को चार भागो में बटा गया हैं-

  • संज्ञा से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
  • विशेषण से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
  • संज्ञा से विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
  • क्रिया विशेषण से विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
संज्ञा से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय

संज्ञा से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय चार प्रकार के होते हैं-
लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय: इस प्रत्यय से छोटेपन या प्यार का बोध होता हैं| जैसे- इया, डा, री इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (संज्ञा)
बेटी इयाबिटिया
छता रीछतरी
मुख डामुखड़ा
रस्सा रस्सी
लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय

भाववाचक तद्धित प्रत्यय: इनसे भाववाचक संज्ञाय बनती हैं| जैसे- आई, त, त्व, स इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (संज्ञा)
बच्चा पनबचपन
पूजा पापूजापा
खेत खेती
मानव तामनावता
भाववाचक तद्धित प्रत्यय

पेशा या जातिवाचक तद्धित प्रत्यय: इस प्रत्यय के द्वारा जीविका चलाने का बोध होता हैं| जैसे- गर, दार, हारा, एरा इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (संज्ञा)
सोना आरसोनार
लिपि लिपिक
जादूगरजादूगर
चित्र एराचित्तेरा
पेशा या जातिवाचक तद्धित प्रत्यय

सम्बन्धवाचक या अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय: इस प्रत्यय से बने शब्द संतान के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं| जैसे- आई, ई, पा इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (संज्ञा)
दशरथ दाशरथि
कुंती एयकौन्तेय
सम्बन्धवाचक या अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय
विशेषण से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय

कुछ प्रत्यय ऐसे होते हैं, जो विशेषण शब्दों में लगकर भाववाचक संज्ञाएँ बनाते हैं| जैसे- आहट, त्व, पा आई इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (विशेषण) प्रत्ययतद्धितांत रूप (संज्ञा)
अच्छा आईअच्छाई
खुशखुशी
लघु तालघुता
पीलापनपीलापन
विशेषण से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय
संज्ञा से विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय

संज्ञा से विशेषण बनाने वाले प्रत्यय चार प्रकार के होते हैं-
गुणवाचक तद्धित प्रत्यय: इसमें गुण, धर्म इत्यादि का बोध कराने वाले शब्द बनते हैं| जैसे- आ, ईला, इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (विशेषण)
गुलाब गुलाबी
नमकइननमकीन
प्यासप्यासा
काँटाइलाकँटीला
गुणवाचक तद्धित प्रत्यय

स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय: इस प्रत्यय के लगने से स्थान से संबध व्यक्ति या वस्तु का बोध होता हैं| जैसे- इया, ई, एलू इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (विशेषण)
घरएलूघरेलू
पटना इयापटनिया
जापानजापानी
बाजारबाजारू
स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय

रिश्ताबोधक तद्धित प्रत्यय: इन प्रत्ययों के लगने से किसी न किसी रिश्ते का बोध होता हैं| जैसे- एरा इत्यादि| उदाहरण-
शब्द(संज्ञा) प्रत्यय तद्धितांत रूप (विशेषण)

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (विशेषण)
मौसाएरामौसेरा
चाचाएराचचेरा
रिश्ताबोधक तद्धित प्रत्यय

सम्बन्धवाचक तद्धित प्रत्यय: इन प्रत्ययों के लगने से व्यक्ति या वस्तु से सम्बंधित सम्बन्ध का बोध होता हैं| जैसे- इक, आना इत्यादि| उदाहरण-
शब्द(संज्ञा) प्रत्यय तद्धितांत रूप (विशेषण)

शब्द (संज्ञा)प्रत्ययतद्धितांत रूप (विशेषण)
धर्मइकधार्मिक
मर्दआनामर्दाना
सम्बन्धवाचक तद्धित प्रत्यय
क्रिया विशेषण से विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय

कुछ प्रत्यय क्रिया विशेषण में लगकर विशेषण भी बनाते हैं| जैसे- ला इत्यादि| उदाहरण-

शब्द (क्रिया विशेषण)प्रत्ययतद्धितांत रूप (विशेषण)
निचेलानिचला
पीछेलापिछला
क्रिया विशेषण से विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय

प्रत्यय और उपसर्ग में क्या अंतर है?

उपसर्ग और प्रत्यय का एक मुलभुत अंतर यह होता हैं, कि उपसर्ग किसी भी शब्द के शुरुआत में जुड़ता हैं, और प्रत्यय किसी भी शब्द के अंत में जुड़ता हैं|

परीक्षा में पूछे गए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

निचे परीक्षा में पूछे गए कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यय के 30 उदाहरण की सूचि दी गई हैं, जिसमे शब्द में से प्रत्यय को पृथक करना हैं-

शब्दप्रत्यय
अनंतता ता
वर्षों ओं
कोमलता ता
अवकाशवाली वाली
व्यक्तिगतगत
नूपुरोंओं
कविताएँ एँ
सोचकर कर
पथरीली
बदलनी
सभ्यता ता
छुट्टियाँईयाँ
आतंकितइत
ईमानदारी
ग्रामीणईन
आगुन्तकोंओं
सम्बन्धी
स्त्रियाँ ईयाँ
पुकारकरकर
नाखुनोंओं
हजारोंओं
प्रमाणितइत
फिरता
नम्रताता
स्वदेशी
हँसकरकर
विचलितइत
दशाओंओं
चौथाई आई
मलबे
परीक्षा में पूछे गए कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

FAQs

प्रत्यय (pratyay) की परिभाषा दो?

प्रत्यय (pratyay) उस शब्दांश को कहते हैं, जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर उस शब्द के भिन्न अर्थ को प्रकट करता हैं|

प्रत्यय (pratyay) के कितने भेद होते हैं?

प्रत्यय के दो भेद होते हैं- कृत्त प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय|

तद्धित प्रत्यय के कितने भेद हैं|

तद्धित प्रत्यय के चार भेद हैं- संज्ञा से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय, विशेषण से संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय, संज्ञा से विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय, और क्रिया विशेषण से विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय|

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Vachan

संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, और क्रिया के जिस रूप से संख्या का बोध हो, उसे वचन (Vachan) कहते हैं| वचन का शाब्दिक अर्थ हैं- संख्यावाचन| संख्यावाचन को ही संछिप्त में वचन कहते हैं|

Vachan
Vachan

वचन (Vachan) की परिभाषा

शब्द के जिस रूप से एक या एक से अधिक का बोध होता हैं, उसे हिंदी व्याकरण में वचन (Vachan) कहते हैं| दूसरे शब्दों में ‘वचन’ संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, और क्रिया की संख्या का बोध कराता हैं| जैसे-

  • गोदाम में सब्जियां रखी हैं|
  • माली पौधे सींच रहा हैं|

इन वाक्यों में गोदाम तथा माली शब्द एक होने का और सब्जियां तथा पौधे अधिक होने का ज्ञान करा रहे हैं| इसलिए गोदाम तथा माली एक संख्या को दर्शाते हैं, तथा सब्जिया और पौधे अधिक संख्या को दर्शाते हैं|

वचन (Vachan) के भेद

वचन (Vachan) संख्या का बोध कराता हैं| इसलिए संख्या के आधार पर वचन (Vachan) के दो भेद होते हैं| पहला वह जिसमे एक व्यक्ति या वस्तु होने का बोध हो और दूसरा वह जिसमे एक से अधिक व्यक्ति या वस्तु होने का बोध हो| निचे इसकी पूरी जानकारी दी गई हैं-

एकवचन

शब्दों के जिस रूप से एक व्यक्ति या वस्तु का बोध होता हैं, उसे एकवचन कहते हैं| जैसे- लड़का, गाय, माता, बन्दर, बकरी, संतरा, तोता इत्यादि| उदाहरण

  • एक लड़का बाजार जा रहा हैं|
  • गाय चार रही हैं|
  • राधा की माता स्कूल में टीचर हैं|
  • बन्दर छत पर हैं|
  • बकरी रस्ते में चल रही हैं|
  • यह संतरा अच्छा नहीं हैं|
  • मेरे पास एक तोता हैं|

बहुवचन

शब्दों के जिस रूप से एक से अधिक व्यक्ति या वस्तु होने का बोध हो, उसे बहुवचन कहते हैं| जैसे- लड़के, गाये, मताये, रोटियां, घरो, गाड़िया, पुस्तके इत्यादि| उदाहरण

  • कुछ लड़के बाजार जा रहे हैं|
  • गाये चार रही हैं|
  • पूजा के लिए कुछ मताये मंदिर जा रही हैं|
  • कुछ रोटियां उसे दे दो|
  • कुछ घरो में साफ़ पानी नहीं आ रहा हैं|
  • मोहन के पास बहुत साड़ी गाड़िया हैं|
  • कुछ पुस्तके उससे ले लो|

वचन (Vachan) को कैसे पहचाने?

वचन (Vachan) की पहचान संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अथवा क्रिया के द्वारा होती हैं| हमने पहले जाना था कि, ये दो प्रकार की होती हैं- एकवचन और बहुवचन | एकवचन का अर्थ हैं- किसी एक वस्तु या व्यक्ति का बोध कराना लेकिन बहुवचन का अर्थ हैं- एक से अधिक वस्तु या व्यक्ति का बोध कराना| इसके कुछ अपवाद भी हैं| जहाँ पर यह पूर्ण रूप से लागू नहीं होते हैं| इसका मतलब यह अपने भाव, आदर इत्यादि को प्रकट करने के लिए एकवचन के स्थान पर बहुवचन का तथा बहुवचन के स्थान पर एकवचन का उपयोग किया जाता हैं| निचे उदाहरण के साथ इसकी जानकारी दी गई हैं-

आदर प्रकट करने के लिए|

आदर प्रकट करने के लिए एकवचन के स्थान पर बहुवचन का प्रयोग किया जाता हैं| जैसे-

  • माता जी, आप कब आयी|
  • मेरे पिताजी कोलकाता गए हैं|
  • टीचर पढ़ा रहे हैं|
  • नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं|

कुछ ऐसे शब्द जो हमेशा एकवचन में रहते हैं|

हिंदी के कुछ ऐसे शब्द भी हैं, जो हमेशा एकवचन में रहते हैं| जैसे-

  • पानी मत गिराओ, वरना सारा पानी ख़तम हो जायगा|
  • उसे बहुत क्रोध आ रहा हैं|
  • नेता को सदैव अपनी जनता का ख्याल रखना चाहिए|

कुछ संज्ञाएँ जो हमेशा एकवचन में प्रयुक्त होता हैं|

द्रव्यवाचक, भाववाचक, तथा व्यक्तिवाचक संज्ञाय हमेशा एकवचन में प्रयुक्त होता हैं| जैसे-

  • चावल बहुत महंगा हो गया हैं|
  • अच्छाई का सदा जित होता हैं|
  • कर्म ही पूजा हैं|
  • आरती बुद्धिमान हैं|

कुछ ऐसे शब्द जो हमेशा बहुवचन में रहते हैं|

हिंदी के कुछ ऐसे शब्द भी हैं, जो हमेशा बहुवचन में रहते हैं| जैसे-

  • आजकल रेशमा के बाल बहुत झड़ रहे हैं|
  • किट्टू जब से अफसर बना हैं, तब से उसके दर्शन ही दुर्लभ हो गए हैं|
  • आजकल हर एक वस्तु के दाम बढ़ गए हैं|

वचन (Vachan) बनाने के नियम

वचन बनाने के कुछ नियम होते हैं| एकवचन से बहुवचन बनाना और बहुवचन से एक वचन बनाना ज्यादा सरल भी नहीं हैं, और ज्यादा कठिन भी नहीं हैं|

एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम

एकवचन से बहुवचन बनाने के कुछ नियम निचे दिए ज रहे हैं, जिससे स्टूडेंट्स को समझने में और आसानी हो|

आकारांत पुल्लिंग शब्दों में ‘आ’ के स्थान पर ‘ए’ लगाने पर

  • कपडा – कपडे
  • लड़का- लड़के
  • पत्ता- पत्ते
  • बेटा- बेटे
  • कुत्ता- कुत्ते

आकारांत स्त्रीलिंग शब्दों में ‘अ’ के स्थान पर ‘ऐं’ लगाने पर

  • बात- बाते
  • रात- राते
  • चादर- चादरे
  • बहन- बहने
  • सड़क- सड़के

आकारांत स्त्रीलिंग एकवचन संज्ञा शब्दों के अंत में ‘एँ’ लगाने पर

  • कन्या- कन्याएँ
  • कामना- कामनाएँ
  • वस्तु- वस्तुएँ

जब शब्दों का दो बार प्रयोग किया जाता हैं|

  • भाई- भाई- भाई
  • गांव- गांव- गांव
  • घर- घर- घर

बहुवचन से एकवचन बनाने के नियम

बहुवचन से एकवचन बनाने के कुछ नियम निचे दिए ज रहे हैं, जिससे स्टूडेंट्स को समझने में और आसानी हो|

जिन संज्ञाओ के अंत में ‘या’ के ऊपर चंद्र बिंदु होता हैं, उसमे सिर्फ ‘या’ लगाने पर

  • बिन्दियाँ- बिंदिया
  • गुड़ियाँ- गुड़िया
  • चिड़ियाँ- चिड़िया
  • डिबियाँ- डिबिया

इकारांत स्त्रीलिंग शब्दों में ‘याँ’ हटाने पर

  • नदियाँ- नदी
  • लड़कियाँ- लड़की
  • रीतियाँ- रीति

कुछ शब्दों में गुण, वर्ण, भाव आदि शब्द हटाने पर

  • मित्रवर्ग- मित्र
  • व्यापारीगण- व्यापारी
  • सुधिजन- सुधि

आकारांत पुल्लिंग शब्दों में ‘ए’ के स्थान पर ‘आ’ लगाने पर

  • तारे- तारा
  • मुर्गे- मुर्गा
  • जूते- जूता
  • कपडे- कपडा

वचन (Vachan) परिवर्तन

एकवचन का बहुवचन में परिवर्तन तथा बहुवचन का एकवचन में परिवर्तन के कुछ उदाहरण निचे चार्ट में दिए गए हैं-

एकवचनबहुवचन
पुस्तकपुस्तके
आँखआँखे
अलमारीअलमारियाँ
रातराते
कलमकलमे
गायगाये
वधू वधुएँ
कविकविगण
दवाईदवाइयाँ
साधुसाधुओ
घरघरो
रुपयारूपये
लड़कालड़के
स्त्रीस्त्रियाँ
नदीनदियाँ
शाखाशाखाएँ
गतिगतियाँ
घोडाघोड़े
बच्चाबच्चे
गलीगलियो
वचन परिवर्तन

FAQs

वचन के उदाहरण दो?

वचन के कुछ उदाहरण-
मैदान में ‘गाये’ चार रही हैं|
‘लड़की;’ खेलती हैं|
ट्रक में ‘सब्जियाँ’ रखी हैं|

वचन कितने प्रकार के होते हैं?

वचन दो प्रकार की होती हैं- एकवचन और बहुवचन|

एक वचन किसे कहते हैं?

संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु के एक या एक से अधिक होने का पता चले उसे वचन कहते हैं|

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लिंग का सही मायने में अर्थ एवं इसके प्रकार उदहारण सहित

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Ling in hindi: लिंग का सही मायने में अर्थ एवं इसके प्रकार उदहारण सहित 2024-25

Ling

संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की नर या मादा जाती का बोध हो, उसे लिंग (ling) कहते हैं| अर्थात लिंग शब्द की जाती को दर्शाता हैं| लिंग के दो भेद होते हैं- पुल्लिंग और स्त्रीलिंग|

Ling
Ling

लिंग (Ling) का अर्थ एवं परिभाषा

लिंग (Ling) संस्कृत भाषा का एक शब्द हैं, जिसका अर्थ होता हैं- निशान या चिन्ह| अर्थात लिंग संज्ञा शब्दो में पुरुष या स्त्री जाती होने का बोध कराता हैं| जिस संज्ञा शब्द से व्यक्ति की जाती का पता चलता हैं, उसे लिंग कहते हैं| लिंग के माध्यम से ही हमें यह ज्ञात हो पता हैं, कि कोई भी व्यक्ति या वस्तु नर जाती का हैं, या मादा जाती का हैं| जैसे- बैल, मोर, लड़का, गाय, बकरी, लड़की इत्यादि|

लिंग (Ling) के भेद

पुरुष तथा स्त्री जाती का बोध कराने के लिए लिंग के दो भेद होते हैं-

  • पुल्लिंग
  • स्त्रीलिंग

पुल्लिंग (Pulling)

जिन शब्दो से पुरुष जाती का बोध होता हैं, उसे पुल्लिंग (Pulling) कहते हैं| दूसरे शब्दों में पुल्लिंग संज्ञा के शब्दों से पुरुष जाती का बोध होता हैं| जैसे- खटमल, पिता, घोडा, बन्दर, कुत्ता, लड़का, राजा इत्यादि|

पुल्लिंग की पहचान कैसे करे?

जिन शब्दो के अंत में अ, त्व, आ, आव, पा, पन, न, क, औडा इत्यादि प्रत्यय आये वे पुल्लिंग होते हैं| जैसे- मन, तन, राम, कृष्ण, बचपन, वन, शेर, बुढ़ापा इत्यादि| कुछ ऐसे संज्ञाए भी हैं, जो हमेशा पुल्लिंग रहती हैं| जैसे- खरगोश, चीता, खटमल, भेड़िया, मच्छर इत्यादि| पुल्लिंग की पहचान कई तरह के नमो से हो सकता हैं, जैसे- दिन, पेड़, पर्वत, सागर, फूल इत्यादि| इसका सम्पूर्ण जानकारी निचे दिया गया हैं|

  • दिनों के नाम- सोमवार, मंगलवार, बुधवार, वीरवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार इत्यादि|
  • पर्वतो के नाम- हिमालय, एवरेस्ट, सतपुड़ा इत्यादि|
  • देशो के नाम- भारत, अमेरिका, चीनइत्यादि|
  • नगरों के नाम- दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता चेन्नई इत्यादि|
  • फलो के नाम- केला, आम, अमरुद इत्यादि|
  • अनाजों के नाम- गेहूं, बाजरा, चना, इत्यादि|
  • फूलो के नाम- कमल, गुलाब, गेंदा इत्यादि|
  • सागर के नाम- हिन्द महासागर, प्रशांत महासागर, अरब सागर इत्यादि|
  • शरीर के अंगो के नाम- हाथ, पैर, अंगूठा, सिर, मुँह, दांत इत्यादि|
  • धातुओं के नाम- ताम्बा, लोहा, सोना, पारा इत्यादि|

स्त्रीलिंग (Striling)

जिन शब्दो से स्त्री जाती का बोध होता हैं, उसे स्त्रीलिंग (Striling) कहते हैं| दूसरे शब्दों में स्त्रीलिंग संज्ञा के शब्दों से स्त्री जाती का बोध होता हैं| जैसे- माता, लड़की, बकरी, लक्ष्मी, औरत इत्यादि|

स्त्रीलिंग की पहचान कैसे करे?

जिन शब्दों के अंत में ख, ट, वट, हट, आनी, आ, ता, आई, आवट, इया, आहट इत्यादि प्रत्यय आये वे स्त्रीलिंग होते हैं| जैसे- आहाट, शत्रुता, राख, कड़वाहट, सजावट इत्यादि| स्त्रीलिंग में भी कुछ ऐसे संज्ञाए हैं, जो हमेशा स्त्रीलिंग रहती हैं| जैसे- मक्खी, तितली, कोयल, मछली, मैना इत्यादि| स्त्रीलिंग की पहचान कई तरह के नामो से हो सकता हैं| जैसे- भाषा, मशाले, नदिया, पुस्तक इत्यादि| इसका सम्पूर्ण जानकारी निचे दिया गया हैं|

  • नक्षत्रो के नाम- भरणी, रेवती, चित्रा इत्यादि|
  • बोलियों के नाम- ब्रज, बुंदेली, हिंदी इत्यादि|
  • नदियों के नाम- गंगा, यमुना, रावी, कावेरी, गोदावरी इत्यादि|
  • पुस्तकों के नाम- रामायण, गीता, कुरान इत्यादि|
  • आहारों के नाम- रोटी, सब्जी, दाल इत्यादि|
  • आभूषणो के नाम- चूड़ी, बिंदी, पायल, माला, नथ इत्यादि|
  • परिधानों के नाम- सलवार, चुन्नी, साड़ी, कमीज़ इत्यादि|
  • मसालों के नाम- लौंग, हल्दी, मिर्च, दालचीनी, चाय इत्यादि|

वह कौन-कौन से शब्द हैं, जो पुल्लिंग तथा स्त्रीलिंग दोनों में प्रयुक्त होते हैं?

हिंदी में ऐसे कई सारे शब्द हैं जिसका प्रयोग पुल्लिंग (Pulling) और स्त्रीलिंग (Striling) दोनों के लिए सामान रूप से किया जाता हैं| इन शब्दों में ऐसा कोई भेद नहीं हैं, जो सिर्फ केवल पुरुष के लिए इस्तमाल किया जाय या सिर्फ स्त्री के लिए इस्तमाल किया जाय| इन शब्दों का सामान रूप से प्रयोग किया जाता हैं| निचे सारे शब्द दिए गए हैं-

  • प्रधानमंत्री
  • मुख्यमंत्री
  • राष्ट्रपति
  • उपराष्ट्रपति
  • मेहमान
  • मंत्री
  • बर्फ
  • चित्रकार
  • मैनेजर
  • प्रोफेसर
  • शिशु
  • पत्रकार
  • गवर्नर
  • वकील

100 से अधिक पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के शब्द

निचे 100 से अधिक पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्दों का विवरण दिया गया हैं-

पुल्लिंगस्त्रीलिंग
हलवाई हलवाईन
गुरु गुरुआइन
तोता मादा तोता
पालक पालिका
बालक बालिका
पड़ोस पड़ोसिन
बलवान बलवती
बकरा बकरी
सिंह सिहनी
दर्जी दर्जिन
बाबू बबुआइन
दंडी दंडिनी
गुड्डा गुड़िया
महान महती
साधु साध्वी
दादा दादी
घोडा घोड़ी
नर मादा
गधा गधी
नालानाली
मेहतर मेहतरानी
जेठ जेठरानी
देवर देवरानी
पंडित पंडिताईन
ठाकुर ठाकुरानी
बनिया बनियाइन
बाघ बाघिनि
तेली तेलिनी
मोटा मोटी
बन्दर बन्दरी
युवक युवती
चूहाचुहिया
सन्यासी सन्यासिनी
बेटाबिटिया
लोटा लुटिया
बूढ़ा बूढीया
कुत्ता कुत्तिया
तनुज तनुजा
पूज्य पूज्या
सेवक सेविका
स्वामी स्वामिनी
तपस्वी तपस्विनी
मच्छर मादा मच्छर
श्रीमानश्रीमती
बुद्धिमान बुद्धिमती
सेठ सेठरानी
लड़का लड़की
गंगा गूंगी
देव देवी
नर नारी
भाग्यवान भाग्यवती
आयुष्मान आयुष्मती
धनवान धनवती
चंचलचंचलता
नेतानेत्री
धाता धात्री
अभिनेता अभिनेत्री
ऊंट ऊंटनी
शेर शेरनी
फूफा बुआ
माता पिता
गाय बैल
भाई बहन
कबूतर कबूतरी
काला काली
पोता पोती
राजा रानी
अध्यापकअध्यापिका
संपादक संपादिका
मर्द औरत
पुत्रकन्या
माली मालिनी
धोबी धोबिनी
दाता दात्री
भक्षक भक्षिकानायक
नाती नातिन
कुम्हारकुम्हारिन
बाघ बाघिन
सांपसाँपिन
श्याम श्यामा
प्रिय प्रिया
रचयिता रचयित्री
बिधाता बिधात्री
वक्ता वक्त्रि
ग्वाला ग्वालिन
वर वधू
सूत सुता
हितकारी हितकारिनी
परोपकारी परोपकारिनी
दासदासी
नागनागिन
मामा मामी
बिलाव बिल्ली
बेटा बेटी
गायकगायिका
पाठकपाठिका
चालक चालिका
भीलभीलनी
हंसहँसनी
मोरमोरनी
चोरचोरनी
हाथीहथिनी
माँबाप
100 से अधिक पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के शब्द

FAQs

लिंग को कितने भागो में बाटा गया हैं?

लिंग को दो भागो में बाटा गया हैं- पुल्लिंग और स्त्रीलिंग|

कुछ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्दों के उदाहरण दो?

कुछ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्दों के उदाहरण-
पुल्लिंग– तपस्वी, माता, सांप इत्यादि|
स्त्रीलिंग– तपस्विनी, पिता, साँपिन इत्यादि|

वक्ता का स्त्रीलिंग क्या होगा?

वक्ता का स्त्रीलिंग वक्त्रि होगा|

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Avyay in hindi: जाने अव्यय का सही मायने में अर्थ, परिभाषा और भेद उदाहरण सहित 2024-25

avyay

जिन शब्दो के रूप में लिंग, वचन, कारक, काल इत्यादि की वजह से कोई परिवर्तन नहीं होता उसे अव्यय (avyay) शब्द कहते हैं| अव्यय शब्द हर स्थिति में अपने मूल रूप में रहते हैं| इन शब्दो को अविकारी शब्द भी कहा जाता हैं|

avyay
avyay

अव्यय (avyay) का सही मायने में अर्थ एवं परिभाषा

अव्यय का शाब्दिक अर्थ होता हैं- जो व्यय ना हो| अर्थात अव्यय ऐसे शब्दो को कहते हैं, जिसमे लिंग, वचन, पुरुष, कारक, काल इत्यादि के कारण कोई प्रभाव नहीं पड़ता| दूसरे शब्दो में जिन पर लिंग, वचन, कारक, पुरुष, काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता एवं वचन, कारक इत्यादि बदलने पर भी ये ज्यो के त्यों बने रहते हैं, तो ऐसे शब्दो को अव्यय शब्द कहते हैं|

अव्यय का रूपांतरण नहीं होता हैं, इसलिए ऐसे शब्द अविकारी होते हैं| इनका व्यय नहीं होता इसलिए ये अव्यय हैं| जैसे- जब, तब, इधर, कब, वाह, तथा, किन्तु, परन्तु, इसलिए इत्यादि|

अव्यय (avyay) के भेद

अव्यय (avyay) के पांच भेद होते हैं-

  • क्रिया विशेषण अव्यय
  • सम्बन्धबोधक अव्यय
  • समुच्चयबोधक अव्यय
  • विस्मयादिबोधक अव्यय
  • निपात अव्यय

क्रिया विशेषण अव्यय

जिस शब्द से क्रिया की विशेषता ज्ञात हो उसे क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं| दूसरे शब्दो में क्रिया विशेषण का अर्थ क्रिया के अर्थ की विशेषता प्रकट करना हैं| जैसे- यहाँ, अब, वहॉ, तक, जल्दी इत्यादि| उदाहरण

  • वह यहाँ से चली गई|
  • अब काम करना बंद कर दो|
  • वे लोग सुबह में पहुंचे|
  • वह यहाँ आता हैं|
  • सीता सुन्दर लिखती हैं|

क्रिया विशेषण अव्यय के भेद

क्रिया विशेषण को प्रयोग, रूप और अर्थ के अनुसार इसके कई भेद हैं| जैसे- साधारण क्रिया विशेषण अव्यय, संयोजक क्रिया विशेषण अव्यय, अनुबद्ध क्रिया विशेषण अव्यय, मूल क्रिया विशेषण अव्यय, यौगिक क्रिया विशेषण अव्यय, स्थानीय क्रिया विशेषण अव्यय, कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय इत्यादि|

प्रयोग के आधार पर
  • साधारण क्रियाविशेषण अव्यय: जिन शब्दो का प्रयोग वाक्यों में स्वतंत्र रूप से किया जाता हैं, उसे साधारण क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| उदाहरण
    • हाय रब्बा! अब क्या होगा|
    • बेटी, जल्दी जाओ| बन्दर कहाँ गया|
  • संयोजक क्रियाविशेषण अव्यय: जिन शब्दो का सम्बन्ध किसी उपवाक्य के साथ होता हैं, उसे संयोजक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| उदाहरण
    • जब मोहिनी ही नहीं, तो में जीकर क्या करूँगा|
    • जहाँ अभी जंगल हैं, वहां किसी समय समुद्र था|
  • अनुबद्ध क्रियाविशेषण अव्यय: जिन शब्दो का प्रयोग निश्चय के लिए किसी भी शब्द भेद के साथ किया जाता हैं, उसे अनुबद्ध क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| उदाहरण
    • मैंने उसे देखा तक नहीं|
    • आपके आने भर की देर हैं|
    • हाय रब्बा! अब क्या होगा|
    • बेटी, जल्दी जाओ| बन्दर कहाँ गया|
रूप के आधार पर
  • मूल क्रियाविशेषण अव्यय: ऐसे क्रियाविशेषण जो किसी दूसरे शब्दो के मेल से नहीं बनते हैं, उसे मूल क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| जैसे- ठीक, अचानक, फिर इत्यादि| उदाहरण
    • अचानक से बाढ़ आ गया|
    • मै अभी नहीं आया|
  • यौगिक क्रियाविशेषण अव्यय: जो शब्द दूसरे शब्द में प्रत्यय या पद जोड़ने से बनते हैं, उसे यौगिक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| जैसे- मन से, जिससे, भूल से, वहां पर इत्यादि| उदाहरण
    • तुम सुबह तक पहुंच जाना|
    • वह शांति से जा रही थी|
  • स्थानीय क्रियाविशेषण अव्यय: ऐसे क्रियाविशेषण जो बिना रूपांतरण के किसी स्थान पर आते हैं, उसे स्थानीय क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| उदाहरण
    • वह अपना सिर पढ़ेगा|
    • तुम दौड़कर चलते हो|
अर्थ के आधार पर
  • कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय: जिन शब्दो से क्रिया के होने का समय ज्ञात होता हैं, उसे कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| जैसे- अभी, रातभर, जब, दिनभर, लगातार इत्यादि| उदाहरण
    • वह नित्य जाता हैं|
    • राम कल आएगा|
    • दिन भर कोहरा होता हैं|
    • राधा कल आएगी|
  • स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय: जिन शब्दो से क्रिया के होने के स्थान का पता चलता हैं, उसे स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| जैसे- वहां, पास, दूर, आगे, पीछे इत्यादि| उदाहरण
    • मै कहाँ जाऊ|
    • मोहन निचे बैठा हैं|
    • वह पीछे चला गया|
    • इधर मत जाओ|
  • परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय: जिन शब्दो से क्रिया अथवा क्रिया विशेषण का परिमाण ज्ञात होता हैं, उसे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| इस अव्यय शब्द से नाप-तौल का पता चलता हैं| जैसे- काफी, ठीक, बहुत, केवल, बस इत्यादि| उदाहरण
    • तुम बहुत घबरा रही हो|
    • इतना ही बोलो जितना जरुरी हो|
    • मोहन बहुत बोलता हैं|
  • रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय: किसी भी वाक्य में वह शब्द जिनसे क्रिया के होने की रीती या विधि का ज्ञान हो, उसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय कहते हैं| जैसे- वैसे, इसलिए, ठीक, शायद इत्यादि| उदाहरण
    • जरा, सहज एवं धीरे चलिए|
    • हमारे सामने हाथी अचानक आ गया|
    • राधा जल्दी से अपने घर चली गई|

सम्बन्धबोधक अव्यय

वह अविकारी शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम शब्दो के साथ मिलकर दूसरे शब्दो से उनका सम्बन्ध बताते हैं, उसे सम्बन्धबोधक अव्यय कहते हैं| जैसे- भर, कारण, से लेकर, सहित इत्यादि| उदाहरण

  • मै कॉलेज तक गया|
  • मोहन पूजा से पहले स्नान करता हैं|
  • छत पर बन्दर बैठा हैं|
  • हॉस्पिटल के पास मेरा घर हैं|

प्रयोग की पुष्टि से सम्बन्धबोधक अव्यय के भेद

प्रयोग की पुष्टि से सम्बन्धबोधक अव्यय के तीन भेद हैं-

  • सविभक्तिक: जो अव्यय शब्द विभक्ति के साथ संज्ञा या सर्वनाम के बाद लगते हैं, उसे सविभक्तिक कहते हैं| जैसे- आगे, पीछे, समीप, ओर इत्यादि| उदाहरण
    • हॉस्पिटल के आगे घर हैं|
    • पश्चिम की ओर नदी हैं|
  • निर्विभक्तिक: जो शब्द विभक्ति के बिना संज्ञा के बाद प्रयोग होते हैं, उसे निर्विभक्तिक कहते हैं| जैसे- तक, समेत, पर्यन्त इत्यादि| उदाहरण
    • वह सुबह तक लौट आया|
    • वह परिवार समेत यहाँ आया|
  • उभय विभक्ति: जो अव्यय शब्द विभक्ति रहित और विभक्ति सहित दोनों प्रकार से आते हैं, उसे उभय विभक्ति कहते हैं| जैसे- द्वारा, रहित, अनुसार इत्यादि| उदाहरण
    • पत्रों द्वारा चिट्ठी भेजे जाते हैं|
    • रीति के अनुसार काम करना|

समुच्चयबोधक अव्यय

दो शब्दो, वाक्यांशों अथवा वाक्यों को जोड़ने वाले शब्दो को समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं| दूसरे शब्दो में समुच्चयबोधक अव्यय का अर्थ दो वाक्यों को परस्पर जोड़ने वाले शब्द से हैं| जैसे- तथा, लेकिन, यदि, अथवा इत्यादि| उदाहरण

  • राम और श्याम कॉलेज जाते हैं|
  • राधा पढ़ती हैं और किट्टू काम करता हैं|
  • राम और लक्ष्मण दोनों भाई थे|

समुच्चयबोधक अव्यय के भेद

समुच्चयबोधक अव्यय के तीन भेद हैं-

  • संयोजक: वह शब्द जो शब्दो या वाक्यों को जोड़ते हैं, उसे संयोजक कहते हैं| जैसे- की, तथा, और इत्यादि| उदाहरण
    • राम ने चावल खाया और मोहन ने रोटी खाया|
  • विभाजक: वह शब्द जिससे विभिन्नता को प्रकट किया जाता हैं, उसे विभाजक कहते हैं| जैसे- या, वा, किन्तु, लेकिन इत्यादि| उदाहरण
    • पेन मिल गया किन्तु पेंसिल नहीं मिला|
  • विकल्पसूचक: जिस शब्द से विकल्प का बोध हो, उसे विकल्पसूचक शब्द कहते हैं| जैसे- तो, अथवा या इत्यादि| उदाहरण
    • मेरा पेन किसने लिया प्रियंका ने या निशा ने|

विस्मयादिबोधक अव्यय

जो अविकारी शब्द हमारे मन के हर्ष, शोक, प्रशंसा, विस्मय दुःख, आश्चर्य, लज्जा इत्यादि भावो को व्यक्त करते हैं, उसे विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं| इनका सम्बन्ध किसी पद से नहीं होता हैं, इसे घोतक भी कहा जाता हैं| इस अव्यय में ! चिन्ह का प्रयोग किया जाता हैं| जैसे अरे, ओह, हाय इत्यादि| उदाहरण

  • हाय! उसे रोक लो|
  • अरे! आप आ गए|
  • हे भगवान्! यह क्या हो गया|

निपात अव्यय

जो वाक्य में नवीनता उत्पन्न करते हैं, उसे निपात कहते हैं| दूसरे शब्दो में निपात अव्यय किसी शब्द या पद के पीछे लगकर उसके अर्थ में विशेष बल लाते हैं| इसे अवधारक भी कहते हैं| जैसे- भी, तो, मात्र, मत, केवल इत्यादि| उदाहरण

  • मोहन भी जायगा|
  • खुद तो डूबोगे ही, सब को डुबाओगे|
  • सिर्फ घूमने मात्र से ही सब कुछ नहीं मिल जाता|
  • सीता ही पढ़ रही हैं|

FAQs

अव्यय किसे कहते हैं?

जिन शब्दो के रूप में लिंग, वचन, कारक इत्यादि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता हैं, उसे अव्यय कहते हैं?

अव्यय के कितने प्रकार के होते हैं?

अव्यय पांच प्रकार के होते हैं- क्रिया विशेषण अव्यय, सम्बन्धबोधक अव्यय, समुच्चयबोधक अव्यय, विस्मयादिबोधक अव्यय, और निपात अव्यय|

क्या अव्यय शब्द हर स्थिति में अपने मूल रूप में रहते हैं?

अव्यय शब्द हर स्थिति में अपने मूल रूप में रहते हैं| इसलिए इन शब्दो को अविकारी शब्द भी कहा जाता हैं|

यह भी जाने
संज्ञा क्या है-परिभाषा एवं भेद उदाहरण सहित: 2024-25
क्या वर्ण तथा हिंदी वर्णमाला अलग-अलग होते हैं?
सर्वनाम किसे कहते हैं? इसके भेद एवं सम्पूर्ण जानकारी उदाहरण सहित
विशेषण की परिभाषा एवं इसके भेद उदाहरण सहित 2024-2025

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Visheshan in hindi: विशेषण की परिभाषा एवं इसके भेद उदाहरण सहित 2024-2025

Visheshan

जिस शब्द से संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता का बोध होता हैं, उसे विशेषण (Visheshan) कहते हैं| जैसे यह बकरी काली हैं, सेव मीठे हैं| विशेषणरहित संज्ञा या सर्वनाम से जिस वस्तु का बोध होता हैं, विशेषण लगने पर उसका अर्थ सिमित हो जाता हैं| जैसे बकरी कहने से बकरी जाति के सभी प्राणिओ का बोध होता हैं, लेकिन काली बकरी कहने से केवल काली बकरी का बोध होता हैं, सभी तरह के बकरी का नहीं|

Visheshan
Visheshan

विशेषण (Visheshan) किसे कहते हैं?

जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (Visheshan) बताते हैं, उसे विशेषण कहते हैं| यह शब्द गुण, भाव, संख्या, दोष, परिणाम आदि से सम्बंधित विशेषता का बोध कराता हैं| अर्थात विशेषण एक ऐसा विकारी शब्द हैं, जो हर हालत में संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता हैं| जैसे:

  • राम एक अच्छा बालक हैं|
  • किट्टू ईमानदार बालक हैं|

उपरोक्त वाक्य में ‘अच्छा‘ और ‘ईमानदार‘ दोनों ही शब्द विशेषण हैं, क्यकि यह दोनों बालको की विशेषता बता रहे हैं|

विशेषण (Visheshan) के 10 उदाहरण

विशेषण (Visheshan) के 10 उदाहरण निचे दिए जा रहे हैं-

  • सीता बुद्धिमान लड़की हैं|
  • बिकाश होनहार बालक हैं|
  • उस दुकान में मीठे आम हैं|
  • मोहन स्मार्ट हैं|
  • भालू भूरा होता हैं|
  • कुछ फल रेशमा को दे दो|
  • यह नदी पतली हैं|
  • मिर्च तीखी हैं|
  • टेबल बहुत बड़ा हैं|
  • अरिंदम लम्बा लड़का हैं|

विशेषण (Visheshan) के भेद

इसके चार भेद होते हैं-

  • गुणवाचक विशेषण
  • संख्यावाचक विशेषण
  • परिमाणवाचक विशेषण
  • सार्वनामिक विशेषण

गुणवाचक विशेषण

वे विशेषण शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम शब्द के गुण, दोष, आकार, अवस्था, स्थान इत्यादि की विशेषता प्रकट करता हैं, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं| अर्थात यह संज्ञा या सर्वनाम के गुण के रूप की विशेषता को दर्शाता हैं| जैसे:

  • गुण– वह भला आदमी हैं|
  • दोष– अनुचित, बुरा, कठोर इत्यादि|
  • आकार– उसकी खिड़की गोल हैं|
  • अवस्था– पिघला, गाढ़ा, दुबला, भारी, पतला, मोटा, गीला, गरीब आदि|
  • स्थान– भीतर, बाहर इत्यादि|
  • रंग– नारंगी टेबल|

संख्यावाचक विशेषण

जब किसी गणना, वस्तुओ की संख्या सम्बन्धी विशेषता बताई जाती हैं, तो उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं| दूसरे शब्दो में संख्या की विशेषता का बोध कराने वाले शब्दो को संख्यावाचक विशेषण कहा जाता हैं| जैसे:

  • एक घर में 5 लोग रहते हैं|
  • मुझे एक मिठाई दे दो|
  • कुछ लोग रोड में चल रहे हैं|

संख्यावाचक विशेषण के भेद

संख्यावाचक विशेषण के में गणना की विशेषता के अनुसार इसके दो भेद होते हैं-

  • निश्चित संख्यावाचक विशेषण: जिस संज्ञा या सर्वनाम के शब्दो से किसी प्राणी, व्यक्ति, वस्तु आदि की संख्या का निश्चित रूप से ज्ञान हो, उसे निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं| जैसे:
    • मेरी कॉलेज में 100 स्टूडेंट्स हैं|
    • एक बस में 70 लोग बैठे हैं|
  • अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण: जिस संज्ञा या सर्वनाम के शब्दो से किसी प्राणी, व्यक्ति, वस्तु आदि की संख्या का निश्चित रूप से बोध ना हो, उसे अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं| जैसे:
    • मेरी कॉलेज में कुछ स्टूडेंट्स हैं|
    • कुछ देर बाद हम चले जायेंगे|

परिमाणवाचक विशेषण

विशेषण के जिस रूप से संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा या नाप तौल के परिणाम की विशेषता ज्ञात हो उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं| जैसे: दो किलो आटा, तीन किलो दाल, कुछ लोग इत्यादि|

परिमाणवाचक विशेषण के भेद

परिमाणवाचक विशेषण को मात्रा अथवा माप तौल के आधार पर दो भागो में बाटा गया हैं, पहला वह भाग जिसमे निश्चित मात्रा का बोध हो और दूसरा वह भाग जिसमे निश्चित मात्रा का बोध न हो| निचे इसका बहुत ही आसान शब्दो में जानकारी दिया गया हैं-

  • निश्चित परिमाणवाचक विशेषण: जिस विशेषण शब्द से किसी वस्तु की निश्चित मात्रा अथवा माप तौल का बोध हो उसे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं| जैसे: सात लीटर तेल, तीन किलो चावल, पांच एकड़ जमीन, आठ किलो मीटर आदि|
  • अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण: जिस विशेषण शब्द से किसी वस्तु की निश्चित मात्रा अथवा माप तौल का बोध ना हो उसे अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं| जैसे: बहुत पानी, ढेर सारा पैसा, बहुत लोग, कुछ पेड़ आदि|

सार्वनामिक विशेषण

जो शब्द सर्वनाम होते हुए भी किसी संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता को प्रकट करे, उसे संकेतवाचक या सार्वनामिक विशेषण कहते हैं| जैसे:

  • वह नौकर नहीं आया|
  • यह घोडा अच्छा हैं|

उपरोक्त वाक्य में ‘नौकर’ और ‘घोडा’ संज्ञाओ के पहले विशेषण के रूप में ‘वह’ और ‘यह’ सर्वनाम ए हैं| अतः ये सार्वनामिक विशेषण हैं|

सार्वनामिक विशेषण के भेद

सार्वनामिक विशेषण के दो भेद हैं-

  • मौलिक सार्वनामिक विशेषण: जो शब्द अपने मूल रूप में संज्ञा के आगे लगकर संज्ञा की विशेषता बताते हैं, उसे मौलिक सार्वनामिक विशेषण कहते हैं| जैसे: ‘यह’ घर, ‘वह’ लड़का, ‘कुछ’ काम आदि|
  • यौगिक सार्वनामिक विशेषण: जो मूल सर्वनामों में प्रत्यय लगाने से बनते हैं, उसे यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहते हैं| ‘ऐसा’ आदमी, ‘कैसा’ घर, ‘जैसा’ शहर आदि|

FAQs

विशेषण क्या है?

विशेषण का अर्थ संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता का बोध कराना होता हैं||

विशेषण के कितने भेद होते हैं

विशेषण के चार भेद होते हैं- गुणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण, परिमाणवाचक विशेषण, और सार्वनामिक विशेषण|

परिमाणवाचक विशेषण के कितने भेद हैं?

परिमाणवाचक विशेषण के दो भेद होते हैं- निश्चित परिमाणवाचक विशेषण और अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण|

विशेषण (Visheshan) के कुछ उदाहरण दो?

इसके कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं-
मनोहर अच्छा लड़का हैं|
गीता पूर्ण स्वस्थ हैं|
वह बालक बीमार हैं|

यह भी जाने-
संज्ञा क्या है-परिभाषा एवं भेद उदाहरण सहित: 2024-25
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Sarvanam in hindi: सर्वनाम किसे कहते हैं? इसके भेद एवं सम्पूर्ण जानकारी उदाहरण सहित 2024-25

Sarvanam

संज्ञा के बदले आने वाले शब्द को सर्वनाम (Sarvanam) कहते हैं| सर्वनाम दो शब्दो से मिलकर बना होता हैं, सर्व अर्थात सब और नाम अर्थात किसी व्यक्ति ,वस्तु, स्थान इत्यादि का नाम|

Sarvanam
Sarvanam

सर्वनाम की परिभाषा उदाहरण सहित (Sarvanam ki Paribhasha)

जिन शब्दो का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता हैं, उसे सर्वनाम कहते हैं| अर्थात नामो (संज्ञाओं) के बदले आने वाले शब्द सर्वनाम कहलाता हैं| उदाहरण स्वरुप जैसे: राम आठवीं क्लास में पढता हैं| वह कभी भी अपने ऊपर घमंड नहीं करता| वह अपने टीचर, माता-पिता, तथा बड़ो का आदर करता हैं|

ऊपर दिए गए उदाहरण पर यदि अपने गौर किया होगा, तो राम के स्थान पर वह एवं अपने शब्द का इस्तमाल किया गया हैं| जो राम को ही संकेत करता हैं| वह के स्थान पर कई शब्दो का उपयोग भी किया जा सकता हैं, जैसे: उससे, उसके, स्वयं आदि| ये सभी शब्द सर्वनाम हैं|

सर्वनाम के अन्य उदाहरण

इसे और सरल शब्दो में सिखने के लिए कुछ उदाहरण निचे दिए जा रहे हैं-

  • किट्टू एक विद्यार्थी हैं|
  • वह (किट्टू) रोज कॉलेज जाता हैं|
  • उसका (किट्टू) कॉलेज बोहोत सुन्दर हैं|
  • उसे (किट्टू) घूमना बोहोत पसंद हैं|

ऊपर दिए गए वाक्यों में “किट्टू” शब्द संज्ञा हैं| तथा इसके स्थान पर वह, उसका, एवं उसे शब्द संज्ञा (किट्टू) के स्थान पर प्रयोग किये गए हैं| अतः ये सर्वनाम हैं|

सर्वनाम (Sarvanam) के भेद

सर्वनाम 6 प्रकार के होते हैं:

  • पुरुषवाचक सर्वनाम
  • निश्चयवाचक सर्वनाम
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  • सम्बन्धवाचक सर्वनाम
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम
  • निजवाचक सर्वनाम

पुरुषवाचक सर्वनाम

जिस शब्दो से व्यक्ति का बोध होता हैं, उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहा जाता हैं| पुरुषवाचक सर्वनाम पुरुषो (पुरुष या स्त्री) के नाम के बदले आते हैं| उदाहरण: मैं आता हूँ| तुम आते हों| वह भागता हैं| इसमें मैं, तुम, वह “पुरुषवाचक सर्वनाम” के अंतर्गत आता हैं|

पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद

यह 3 प्रकार के होते हैं-

  • उत्तम पुरुष: जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला व्यक्ति खुद के लिए करता हैं, उसे उत्तम पुरुष कहा जाता हैं| जैसे: मै, मेरा, हम, मैंने, मुझे, इत्यादि| उदाहरण-
    • मै खेलने जाऊंगा|
    • मेरा बैग तुम्हारे पास हैं|
    • हम कॉलेज नहीं जायेंगे|
    • मैंने कुछ नहीं किया|
    • मुझे कही नहीं जाना|
  • मध्यम पुरुष: जिस सर्वनाम का प्रयोग सुनने वाले के लिए किया जाता हैं, उसे मध्यम पुरुष कहा जाता हैं| जैसे: तू, तुम, तुम्हारे, आप, आपने इत्यादि| उदाहरण-
    • तुम पढाई कर लो|
    • तुम्हारे पास बुक्स नहीं हैं|
    • आप बोहोत अच्छे हैं|
    • आपने मेरी मदद की|
  • अन्य पुरुष: जिस सर्वनाम का प्रयोग किसी अन्य व्यक्ति के लिए किया जाता हैं, उसे अन्य पुरुष कहा जाता हैं| जैसे: वे, यह, इनसे, उनसे, इनका, इन्हे, उन्होंने आदि| उदाहरण-
  • वे अच्छे लोग हैं|
  • यह काम आसान हैं|
  • इनसे अच्छी चीज मेने आज तक नहीं देखी|
  • इनका वर्ताव अच्छा नहीं हैं|
  • इन्हे स्कूल छोड़ दो|
  • उन्होंने मेरी मदद की|

निश्चयवाचक सर्वनाम

जिन शब्दो से किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना की ओर निश्चयात्मक रूप से संकेत हो, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं| इसे संकेतवाचक सर्वनाम के रूप में भी जाना जाता हैं| अर्थात सर्वनाम के जिस रूप से हमें किसी वस्तु या बात का निश्चित रूप से बोध होता हैं, वह निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाती हैं| जैसे: यह, वह, ये, वे आदि|
उदाहरण: वह मेरा घर हैं| यह मेरी पुस्तक हैं| ये फल हैं|

निश्चयवाचक सर्वनाम के भेद

निश्चयवाचक सर्वनाम दो प्रकार की होती हैं-

  • निकटवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम: जो शब्द निकट यानी कि पास वाली वस्तुओ का निश्चित रूप से बोध कराए उसे निकटवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं| जैसे: यह मेरा पेन हैं| ये चीज मुझे बहुत पसंद हैं|
  • दूरवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम: जो शब्द दूर वाली वस्तुओ का निश्चित रूप से बोध कराए उसे दूरवर्ती निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं| जैसे: वह मेरी बुक हैं| वे आम हैं|

अनिश्चयवाचक सर्वनाम

जिन शब्दो से किसी व्यक्ति, वस्तु इत्यादि का निश्चयपूर्वक बोध न हो उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं| जैसे: कोई, कुछ, किसने, जहाँ, उसने आदि|

उदाहरण:

  • ऐसा न हो कि “कोई” आ जाय|
  • “कुछ” अच्छी बुक्स हैं|
  • “किसने” तुम्हे मारा|
  • “जहाँ” वह रहता हैं|
  • “उसने” कुछ नहीं किया

सम्बन्धवाचक सर्वनाम

जिस शब्दो से परस्पर सम्बन्ध का पता चले उसे सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहते हैं| इस सर्वनाम में जो/ सो/ जैसा/ वैसा इत्यादि होते हैं| इसका प्रयोग वाक्य में सम्बन्ध स्थापित करने के लिए किया जाता हैं|

उदाहरण:

  • जैसा करेगा वैसा भरेगा|
  • जो परिश्रम करते हैं, वे सुखी रहते हैं|
  • जो सोवेगा सो खोवेगा|

प्रश्नवाचक सर्वनाम

जिस सर्वनाम का प्रयोग प्रश्न करने के लिए किया जाता हैं, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं| अर्थात जो सर्वनाम शब्द सवाल पूछने के लिए प्रयुक्त होते हैं, वह प्रश्नवाचक सर्वनाम कहलाता हैं|

उदाहरण:

  • आपने क्या खाया हैं?
  • वह क्यों इंतज़ार कर रहा हैं?
  • बाहर कौन खड़ा हैं?

निजवाचक सर्वनाम

निजवाचक दो शब्दो से मिलकर बना हैं| जिसमे निज का अर्थ होता हैं, अपना और वाचक का अर्थ होता हैं- बोध | जिस सर्वनाम में अपनेपन का बोध होता हैं, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं| जैसे- अपने, आप, निजी, खुद आदि|

Note: ‘आप’ शब्द का प्रयोग पुरुषवाचक और निजवाचक सर्वनाम दोनों में होता हैं|

उदाहरण:

  • आप कल कॉलेज नहीं गए थे| (माध्यम पुरुष – आदरसूचक)
  • भगवान् भी उन्ही का साथ देता हैं, जो अपनी मदद आप करता हैं| (निजवाचक सर्वनाम)
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FAQ

सर्वनाम (Sarvanam) क्या है?

संज्ञा के बदले में उपयोग किए जाने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं|

सर्वनाम के कितने भेद होते हैं?

सर्वनाम 6 प्रकार के होते हैं| पुरुषवाचक सर्वनाम, निश्चयवाचक सर्वनाम, अनिश्चयवाचक सर्वनाम, सम्बन्धवाचक सर्वनाम, प्रश्नवाचक सर्वनाम, और निजवाचक सर्वनाम|

सर्वनाम के 10 उदाहरण दीजिये?

सर्वनाम के 10 उदाहरण निचे दिए गए हैं-
1. वह रोज कॉलेज जाता हैं|
2. उसका कॉलेज बोहोत सुन्दर हैं
3. उसे घूमना बोहोत पसंद हैं|
4. आप बोहोत अच्छे हैं|
5. आपने मेरी मदद की|
6. यह काम आसान हैं|
7. इनसे अच्छी चीज मेने आज तक नहीं देखी|
8. इनका वर्ताव अच्छा नहीं हैं|
9. इन्हे स्कूल छोड़ दो|
10. उन्होंने मेरी मदद की|

निजवाचक सर्वनाम क्या हैं?

जिस सर्वनाम शब्द का उपयोग कर्त्ता के साथ अपनेपन का ज्ञान कराने के लिए किया जाता हैं, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं|

पुरुषवाचक सर्वनाम कितने प्रकार के होते हैं?

पुरुषवाचक सर्वनाम 3 प्रकार के होते हैं- उत्तम पुरुष, मध्यम पुरुष, और अन्य पुरुष|

क्या वर्ण तथा हिंदी वर्णमाला (Varn tatha hindi varnamala) अलग-अलग होते हैं? 2024-25

hindi-varnamala

वर्ण (Varn) तथा हिंदी वर्णमाला (hindi varnamala) दोनों में अंतर होता हैं| वर्ण की इकाई ध्वनि हैं, तथा वर्णमाला की इकाई वर्ण हैं| दोनों एक दूसरे से सम्बंधित होते हैं, क्युकि वर्णमाला वर्णो के समूह को कहा जाता हैं| बिना वर्ण के वर्णमाला का निर्माण संभव ही नहीं हैं|

hindi-varnamala
hindi varnamala

वर्ण तथा हिंदी वर्णमाला (Varn tatha hindi varnamala)

वर्ण ध्वनि की इकाई हैं, तथा वर्णमाला वर्णो के समूह को कहा जाता हैं| दोनों ही एक दूसरे से सम्बंधित होते हैं| वर्ण के बिना वर्णमाला का निर्माण नहीं हो सकता क्युकि वर्णमाला की इकाई वर्ण हैं| निचे इसका आसान शब्दो में विस्तारपूर्वक विवरण दिया गया हैं|

वर्ण

वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते हैं, जिसके टुकड़े नहीं किये जा सकते हैं| दूसरे शब्दो में वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई हैं| जैसे अ, ई, व, च, आदि|

हिंदी वर्णमाला (hindi varnamala)

वर्णो के समूह को वर्णमाला कहते हैं| अर्थात वर्णमाला किसी भाषा के समस्त वर्णो के समूह को दर्शाता हैं|

हिंदी वर्णमाला के भाग

वर्णमाला को दो भागो में विभाजित किया गया हैं-

  • स्वर
  • व्यंजन

स्वर

वे वर्ण जिनके उच्चारण में किसी अन्य वर्ण के सहायता की आव्यशकता नहीं होती हैं, उसे स्वर कहा जाता हैं| इसके उच्चारण में केवल कंठ तथा तालु का प्रयोग होता हैं, जीभ और होठ का प्रयोग नहीं होता हैं| जैसे: अ, आ, उ, ए, ऊ इत्यादि|

स्वर के भेद

स्वर तीन प्रकार के होते हैं-

  • ह्रस्व स्वर: ह्रस्व स्वर का अर्थ हैं, जिसके उच्चारण में काफी काम समय लगे| जैसे: अ, ऊ, उ, ए इत्यादि|
  • दीर्घ स्वर: जिस वर्ण के उच्चारण में ह्रस्व स्वर का दोगुना समय लगे, उसे दीर्घ स्वर कहा जाता हैं| जैसे ऐ आ ई औ ऊ ऋ इत्यादि|
  • प्लुत स्वर: जिसके उच्चारण में काफी अधिक समय लगता हैं, उसे प्लुत स्वर कहते हैं| जैसे हे राम, या अल्लाह आदि|

व्यंजन

जिन वर्णो को बोलने के लिए स्वर की मदद लेनी पड़ती हैं, उसे व्यंजन कहते हैं| हर व्यंजन के उच्चारण में अ स्वर लगा होता हैं| अ के बिना व्यंजन का उच्चारण नहीं हो सकता हैं| जैसे- क, ख, ग, च, छ, द, म आदि|

व्यंजनो के भेद

व्यंजन तीन प्रकार के होते हैं-

स्पर्श व्यंजन: जिन व्यंजनो का उच्चारण करते समय जीभ मुँह के किसी भी भाग, जैसे- कंठ, तालु, मूर्धा, दांत, या फिर होठ का स्पर्श करती हैं, उसे स्पर्श व्यंजन कहते हैं| यह व्यंजन उच्चारण स्थान की अलग अलग एकता लिए हुए वर्गो में बाटे गए हैं|

ये कुल 25 व्यंजन होते हैं-

  • क वर्ग – यह वर्ग कंठ का स्पर्श करता हैं|
  • च वर्ग – यह वर्ग तालु को स्पर्श करता हैं|
  • ट वर्ग – यह वर्ग मूर्धा का स्पर्श करता हैं|
  • त वर्ग – यह वर्ग दातो को स्पर्श करता हैं|
  • प वर्ग – यह वर्ग होठो का स्पर्श करता हैं|

अन्तस्थ व्यंजन: उच्चारण के समय जो व्यंजन मुख के अंदर ही रहे, उसे अन्तस्थ व्यंजन कहते हैं| इन व्यंजनों का उच्चारण स्वर तथा व्यंजन के मध्य होता हैं| जब भी इनका उच्चारण किया जाता हैं, तब जीभ मुख के किसी भी भाग को स्पर्श नहीं करती| ये व्यंजन चार होते हैं- य , र, ल, व| इनका उच्चारण जीभ, तालु, दांत, और होठ के परस्पर सटने से होता हैं| लेकिन यह पूर्ण रूप से मुख के किसी भी भाग को स्पर्श नहीं करती|

उष्म व्यंजन: जिन वर्णो के उच्चारण के समय हवा मुख के विभ्भिन भागो से टकराय और साँस में गर्मी पैदा कर दे, उन्हें उष्म व्यंजन कहते हैं| इन व्यंजनों का उच्चारण करते समय वायु मुँह से निकलते हुए गर्म हवा निकलती हैं| ये चार व्यंजन होते हैं- श, ष, स, और ह |

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FAQs

हिंदी वर्णमाला में कितने स्वर है?

हिंदी वर्णमाला में 11 स्वर है|

हिंदी वर्णमाला में कितने व्यंजन होते हैं?

हिंदी वर्णमाला में 39 व्यंजन होते हैं|

हिंदी वर्णमाला में कितने वर्ण होते हैं|

हिंदी वर्णमाला में उच्चारण के आधार पर 52 और लेखन के आधार पर 56 वर्ण होते हैं|

Sangya (संज्ञा) क्या है-परिभाषा एवं भेद उदाहरण सहित: 2024-25

sangya ki paribhasha

इस पोस्ट में आसान सब्दो में संज्ञा की परिभाषा (Sangya ki paribhasa) एवं इसके प्रकार के बारे में उदाहरण सहित संछिप्त में वर्णन किया गया हैं|

संज्ञा की परिभाषा

संज्ञा (Sangya) की परिभाषा

संज्ञा उस विकारी शब्द कहते हैं, जिसमें किसी विशेष वस्तु, भाव, और जीव के नाम का बोध होता है। दूसरे सब्दो में संज्ञा का शाब्दिक अर्थ नाम होता हैं| किसी व्यक्ति, गुण, प्राणी, जाती, स्थान, क्रिया, भाव, वस्तु आदि के नाम संज्ञा कहलाती हैं| जैसे: मोर, घोड़ा, रेडियो, किताब, भारत, विरता इत्यादि|

संज्ञा के भेद (प्रकार)

संज्ञा पांच प्रकार के होते हैं:

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper noun)
  • जातिवाचक संज्ञा (Common noun)
  • भाववाचक संज्ञा (Abstract noun)
  • समूहवाचक संज्ञा (Collective nouns)
  • द्रव्यवाचक संज्ञा (Material noun)

व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper noun)

जिस शब्द से किसी विशेष व्यक्ति, जाति, वास्तु तथा स्थान के नाम का बोध हो उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं|
जैसे:
व्यक्ति का नाम– रेखा, राम, हरी, भोला, सचिन इत्यादि|
उत्सवों के नाम– होली, ईद, दिपावली, विजय दशमी आदि|
पर्वतो के नाम– हिमालय, विंध्यांचल, कराकोरम आदि|
स्थान के नाम– अयोध्या, जयपुर, कोलकाता, दिल्ली इत्यादि|
नदियों के नाम– गंगा, कृष्ण, कावेरी, नील आदि|

जातिवाचक संज्ञा (Common noun)

जिस शब्द से एक ही जाति के अनेक प्राणिओ तथा वस्तुओ का बोध हो उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं| दूसरे शब्दो में जिस शब्द से किसी जाति या उसकी श्रेणी वर्ग का सम्पूर्ण बोध होता हैं, उस संज्ञा शब्द को जातिवाचक संज्ञा कहते हैं|
जैसे:
लड़की से प्रियंका, निशा, सपना, अर्चना, भावना इत्यादि|
वस्तु से पुस्तक, कलम, कुर्सी आदि|
नदी से गंगा, यमुना, भगीरथी इत्यादि|
पंछी से संसार की सभी तरह की पंछीओ की जाति आदि|

भाववाचक संज्ञा (Abstract noun)

वे सभी संज्ञा जिसे न तो देखा जा सकता हो और न ही स्पर्श किया जा सकता हो, जिस संज्ञा को केवल महसूस किया जय उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं| अर्थात जिस संज्ञा सब्द से किसी के गुण, दोष, स्वाभाव, भाव इत्यादि का बोध हो उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं| जैसे– बुढ़ापा, गरीबी, हंसी, वीरता, दर्द, भूख, प्यास, प्राण, मोह इत्यादि|

समूहवाचक संज्ञा (Collective nouns)

वे संज्ञा शब्द जिनसे संगठन का बोध हो उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं| अर्थात: जिस संज्ञा शब्द से समूह का बोध हो वह समूहवाचक संज्ञा के अंतर्गत आती हैं| जैसे: भीड़, जनता, सभा, मंडल, गुच्छा इत्यादि|

द्रव्यवाचक संज्ञा (Material noun)

वे वस्तुए जिन्हे मापा, तौला जा सकता हैं, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं| अर्थात: जिन संज्ञा शब्द किसी धातु, द्रव्य या पदार्थ का बोध होता हैं, वह द्रव्यवाचक संज्ञा के अंतर्गत आती हैं| जैसे: लोहा, घी, तेल, सोना इत्यादि|

संज्ञाओं (Sangya) का प्रयोग

संज्ञाओं के प्रयोग में कभी कभी असमानता भी आ जाती हैं, निचे कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

लिंग के अनुसार

नर जाता हैं| – नारी जाती हैं|
लड़का खाता हैं| – लड़की खाती हैं|
इन वाक्यों में नर और लड़का पुल्लिंग हैं| एवं नारी तथा लड़की स्त्रीलिंग| इस प्रकार लिंग के आधार पर संज्ञाओं का रूपांतरण होता हैं|

वचन के अनुसार

एक लड़की जा रही हैं| – चार लड़किया जा रही हैं|
लड़का जाता हैं|- लड़के जाते हैं|
इन वाक्यों में लड़का तथा लड़की एक के लिए आया हैं| और लड़किया तथा लड़के एक से अधिक के लिए| यहाँ संज्ञा के रूपांतरण का आधार वचन हैं|

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FAQs

संज्ञा क्या हैं?

किसी व्यक्ति, प्राणी, जाती, स्थान, क्रिया, भाव, आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं|

संज्ञा के 10 उदाहरण क्या क्या हैं|

संज्ञा के 10 उदाहरण हैं- भारत, विरता, कावेरी, किताब, नील, प्रियंका, सभा, मोर, घोड़ा, रेडियो|

संज्ञा शब्द का क्या अर्थ हैं|

संज्ञा शब्द का अर्थ हैं- किसी व्यक्ति, जाती, क्रिया, प्राणी, स्थान अदि का नाम|